अथर्ववेद काण्ड 18
अथर्ववेद के काण्ड 18 के मंत्र — Sanskrit में रचित, Hindi और English अनुवाद के साथ। यहाँ पढ़ें मूल संस्कृत मंत्र, उनका अर्थ और विश्लेषण।
Kanda 18 · Verse 1
इयं नारीं पतिलोकं वृणाना नि padyata upa tvā martya pretam। धर्मं पुराणमनुपालयन्ती तस्यै प्रज्ञां द्रविणं चह धेहि ॥ १ ॥
यह स्त्री अपने पति के लोक को चुनती हुई, हे मर्त्य (मनुष्य)! मरे हुए के पास जाती है। हे देव! इस पुरानी धर्म-परंपरा का पालन करती हुई, उस स्त्री को बुद्धि और धन प्रदान करो।
Kanda 18 · Verse 2
उदीर्ध्वं नार्यभि जीवलोकं गतासुमेतमुपं शेष एहि । हस्तग्राभस्य दधपोस्तवेदं पत्पुर्जनित्वामभि सं बभूथ ॥ २ ॥